श्री गणेशाये नम:
माता शैलपुत्री, जो वृषभ पर आरूढ है,जिनके दाहिने हाथ मे त्रिशूल और बाये हाथ मे कमल है, जिनके मस्तक पर अर्ध-चन्द्र सुशोभित है|
मै उन्हे बाराम-बार नमस्कार करता हूँ|
माता का प्रथम रूप माता शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है|
पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप मे माता का अवतार हुआ|
वे हिमावती और पार्वती के नाम से जानी गयी|
उनका विवाह् भगवान शिव के साथ हुआ|
पुर्व-जनम मे वे राजा दक्ष की पुत्री सती के रूप मे जनम लिया था| तब भी माता का विवाह् भगवान शिव के साथ हुआ था|
माता पार्वती की वन्दना, समस्त देव्गन देवी- देवता माता शैलपुत्री के रूप मे करते है|
