महाशिवरात्रि के नाम से दो गाने हमेशा याद आ जाते है|
महाशिवरात्रि आई, सुखो की रात्रि आई
मगन मन डोले रे, कहो बम भोले रे
चले भोले बाबा, चले शंकर बाबा
हो के बैल पे सवार, करके अनोखा शृंगार
चले ब्याह रचाने को
हर साल पूरे शहर में, महाशिवरात्रि के अवसर पर, घर गाओं से लोग शिव जी की बारात को देखने को जुटते थे|
सुबह के 11 बजे से बारात शिव जी के पुराने मंदिर से निकल कर पूरे बाज़ार से होते हुए, शाम को शादी के मंदिर पहुचती|
इस बीच सबसे अच्छी सजी टीम को जिले के मॅजिस्ट्रेट पुरस्कार से सामानित करते|
सारा शहर भक्ति भाव मे डूबा रहता |
महिलाए पूरा दिन व्रत रखती और शाम को भगवान शिव की शादी की जा रही मदिर मे कीर्तन कर, अपना व्रत सम्पन करती|
हमारे लिए तो बचपन में वो छुट्टी का दिन होता था| पूरा दिन दोस्तो के साथ मास्तो और खेल -खुद मे बीतता था |
बस इतना होता था की आज भगवान की शादी हुई थी, सो उनकी आनिवर्सयरी मानते है|
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते है|
इस साल भी शिवरात्रि आने वाली है| बस दो दिन ही बचे है :)