हो दूर तुम मुझसे, लेकिन ख्यालो में हो पास |
हर पल है मुझे, उन बीते हुए हर पल का एह्सास ||
कभी किसी और बात से मन को बहलाना, तो कभी मन की उमंगो को जुबा पर न लाना |
दिल की बात चेहरे पर झल्कती थी, और वो मुस्कान मासाअल्लाह कत्ल करती थी||
खुशी होती है सोच कर कि कभी पास थे तुम, जीवन के कुछ पल में साथ थे तुम ||
कभी किसी और बात से मन को बहलाना, तो कभी मन की उमंगो को जुबा पर न लाना |
sahi likha hai aapne… dil baar baar yeh kah uthta hai…
Mann re..
tu…
kahe na…
dheer dhare…!